मै मुस्कुरा रही हूँ आज जा रही हूँ – बेटी की विदाई | Daughter’s farewell

मै मुस्कुरा रही हूँ आज जा रही हूँ – बेटी की विदाई | Daughter’s farewell

मै मुस्कुरा रही हूँ
आज जा रही हूँ
भूलना न मुझे
दूर हूँ मै तुझसे
लेकिन
हूँ पास हमेशा
बेटी हूँ तेरी
हूँ तेरे जिस्म का एक हिस्सा
जब दर्द होगा तुझे दौड़ी आऊंगी मै
तेरे चोटों पे मरहम लगाऊँगी मैं

मुस्कुराते हुए कर दे मुझको विदा
पर न कहना कभी मुझको तू अलविदा
नियति के है रिश्ते निभाने मुझे
क़र्ज़ उसके भी है कुछ चुकाने मुझे
सृष्टि तकती है देखो राहें मेरी
उसकी धरोहर मुझे सौपना है उसे
जाना होगा माँ आज दूर तुझसे
तुने भी तोह निभायी थी मजबूरिया
जन्म दे कर मुझे धर्म पूरा किया

औरत हूँ करना है सार्थक धरम
बेटी बहन अर्धांग्नी और माँ
ये सभी है मेरे हिस्से के कुछ करम
अब जाती हूँ पूरा करने वचन
जो विधाता ने मांगे थे
मुझको देकर जनम
शीश झुका कर मांगती हूँ अशिस
तू माँ है मेरी रख दे हाथ मेरे शीश

बेटी का ये रिश्ता है अनोखा बड़ा
ख़ुशी में भी आज हमको रोना पडा
बेटी होती है हर माँ की आँखों का नूर
इश्वर की देन है
खुदा की है नेमत
बेटी होती है खुदाई की अनोखी सी रहमत

मुबारक हो तुमको मौका ये ख़ुशी का
हर माँ देखती है सपना
इसी घडी का

बेटी की विदाई

कन्यादान हुआ जब पूरा,आया समय विदाई का।

हँसी ख़ुशी सब काम हुआ था,सारी रस्म अदाई का ।

बेटी के उस कातर स्वर ने,बाबुल को झकझोर दिया ।

पूछ रही थी पापा तुमने,क्या सचमुच में छोड़ दिया ।

अपने आँगन की फुलवारी,मुझको सदा कहा तुमने ।

मेरे रोने को पल भर भी ,बिल्कुल नहीं सहा तुमने ।

क्या इस आँगन के कोने में, मेरा कुछ स्थान नहीं ।

अब मेरे रोने का पापा,तुमको बिल्कुल ध्यान नहीं ।

देखो अन्तिम बार देहरी,लोग मुझे पुजवाते हैं ।

आकर के पापा क्यों इनको,आप नहीं धमकाते हैं।

नहीं रोकते चाचा ताऊ,भैया से भी आस नहीं ।

ऐसी भी क्या निष्ठुरता है,कोई आता पास नहीं।

बेटी की बातों को सुन के ,पिता नहीं रह सका खड़ा ।

उमड़ पड़े आँखों से आँसू,बदहवास सा दौड़ पड़ा

कातर बछिया सी वह बेटी,लिपट पिता से रोती थी ।

जैसे यादों के अक्षर वह,अश्रु बिंदु से धोती थी ।

माँ को लगा गोद से कोई,मानो सब कुछ छीन चला ।

फूल सभी घर की फुलवारी से कोई ज्यों बीन चला ।

छोटा भाई भी कोने में,बैठा बैठा सुबक रहा ।

उसको कौन करेगा चुप अब,वह कोने में दुबक रहा ।

बेटी के जाने पर घर ने,जाने क्या क्या खोया है ।

कभी न रोने वाला बापू,फूट फूट कर रोया है ।

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