Dharm Story‎ : बाप पतंग उड़ा रहा था बेटा ध्यान से देख रहा था

Dharm Story‎ : बाप पतंग उड़ा रहा था बेटा ध्यान से देख रहा था

बाप पतंग उड़ा रहा था बेटा ध्यान से देख रहा था
थोड़ी देर बाद बेटा बोला पापा ये धागे की वजह से पतंग और ऊपर नहीं जा पा रही है इसे तोड़ दो
बाप ने धागा तोड़ दिया
पतंग थोडा सा और ऊपर गई और उसके बाद निचे आ गई
तब बाप ने बेटे को समझाया
बेटा जिंदगी में हम जिस उचाई पर है,
हमें अक्सर लगता है ,
की कई चीजे हमें
और ऊपर
जाने से
रोक रही है,
जैसे
घर,
परिवार,
अनुशासन,
दोस्ती,
और हम उनसे आजाद होना चाहते है,
मगर यही चीज होती है
जो हमें उस उचाई पर बना के रखती है.
उन चीजो के बिना हम एक बार तो ऊपर जायेंगे
मगर
बाद में हमारा वो ही हश्र होगा, जो पतंग का हुआ.
इसलिए जिंदगी में कभी भी
अनुशासन का,
घर का ,
परिवार का,
दोस्तों का,
समाज का
रिश्ता कभी मत तोड़ना…
पत्थर तब तक सलामत है जब तक वो पर्वत से जुड़ा है .पत्ता तब तक सलामत है जब तक वो पेड़ से जुड़ा है .इंसान तब तक सलामत है जब तक वो परिवार से जुड़ा है.क्योंकि परिवार से अलग होकर आज़ादी तो मिल जाती है लेकिन संस्कार चले जाते हैं ..एक कब्र पर लिखा था…”किस को क्या इलज़ाम दूं दोस्तो…,जिन्दगी में सताने वाले भी अपने थे,और दफनाने वाले भी अपने थे..

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