मुहावरा भजन सागर – अधजल गगरी छलकत जाय- अर्थात् ओछा आदमी ज्यादा उछलता है

मुहावरा भजन सागर – अधजल गगरी छलकत जाय- अर्थात् ओछा आदमी ज्यादा उछलता है

भजन सागर – अधजल गगरी छलकत जाय- अर्थात् ओछा आदमी ज्‍यादा उछलता है और उसे सब गलत ही दिखते हैं ।

जिसने घमंड किया, उसका पतन अवश्‍य ही हुआ है ।

ध्‍येय की सफलता के लिए पूर्ण एकाग्रता और समर्पण आवश्‍यक होता है ।

जो मनुष्य कार्य करने में सक्षम होता है, वहा अपना कार्य कर लेता है और जो नहीं कर सकता है वह हमेसा दूसरों की कमी ही निकालता रहता है ।

जो झुकना जानता है, दुनिया उसे आगे बढाती है । जो केवल अकडना ही जानता है, दुनिया उसे उखाड़ फेंकती है ।

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जब तक आप अपनी समस्याओं एंव कठिनाइयों की वजह दूसरों को मानते है

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