Shri Hanuman Chalisa | श्री हनुमान चालीसा का पाठ मन को शांति और तन बल देगा

Shri Hanuman Chalisa | श्री हनुमान चालीसा का पाठ मन को शांति और तन बल देगा

||*********|| दोहा ||*********||
श्री गुरु चरण सरोज रज , निज मन मुकुर सुधारि | बरनउँ रघुबर बिमल जासु , जो दायक फल चारि || 1 ||

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरो पवन -कुमार| बल बुद्धि विध्या देहु मोहे , हरहु कलेश बिकार || 2 ||

||*********|| चौपाइयाँ ||*********||
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर | जय कपीस तिहुं लोक उजागर || 1 ||

राम दूत अतुलित बल धामा| अनजानी पुत्र पवन सूत नामा || 2 ||

महाबीर बिक्रम बजरंगी | कुमति निवार सुमति के संगी || 3 ||

कंचन बरन बिराज सुबेसा| कण कुंडल कुंचित केसा || 4 ||

हात वज्र और धवजा बिराजै| काँधे मूँज जनेऊ साजै || 5 ||

शंकर सुवन केसरी नंदन| तेज प्रताप महा जग बन्दन || 6 ||

बिधाबान गुनी आती चतुर| राम काज करिबे को आतुर || 7 ||

प्रभु चरित सुनिबे को रसिया| राम लखन सीता मान बसिया || 8 ||

सूछम रूप धरी सियहि दिखावा| बिकट रूप धरी लंक जरावा || 9 ||

भीम रूप धरी असुर सहारे | रामचंद्र के काज सवारे || 10 ||

लाये संजीवन लखन जियाये| श्रीरघुवीर हर्षी उरे लाये || 11 ||

रघुपति किन्ही बहुत बड़ाई| तुम मम पीर्य भारत सम भाई || 12 ||

सहस बदन तुमरो जस गावे| आस कही श्रीपति कंठ लगावे || 13 ||

सनकादिक ब्रम्हादि मुनीसा| नारद सारद सहित अहिसा || 14 ||

यम कुबेर दिगपाल जहा थे | कबि कोविद कही सके कहा थी || 15 ||

तुम उपकार सुग्रीबिहि कीन्हा | राम मिलाये राज पद दीन्हा || 16 ||

तुमरो मंत्र बिभीषरण माना | लंकेश्वर भये सब जग जान || 17 ||

जुग सहेस जोजन पैर भानु| लिन्यो ताहि मधुर फल जणू || 18 ||

प्रभु मुद्रिका मेली मुख माहि| जलधि लाधी गए अचरज नहीं || 19 ||

दुर्गम काज जगत के जेते| सुगम अनुग्रह तुमरे तेते || 20 ||

राम दुआरे तुम रखवारे| हूट न आगया बिनु पसरे || 21 ||

सब सुख लहै तुम्हरे सरना| तुम रचक कहू को डारना || 22 ||

आपण तेज सम्हारो आपे| तेनो लोक हकतइ कापे || 23 ||

भुत पेसच निकट नहीं आवेह| महावीर जब नाम सुनावेह || 24 ||

नसे रोग हरे सब पीरा| जपत निरंतर हनुमत बल बीरा || 25 ||

संकट से हनुमान चुदावे| मान कम बचन दायाँ जो लावे || 26 ||

सब पैर राम तपस्वी रजा| तिन के काज सकल तुम सजा || 27 ||

और मनोरत जो कई लावे| टसुये अमित जीवन फल पावे || 28 ||

चारो गुज प्रताप तुमारह| है प्रसिद्ध जगत उजयारा || 29 ||

साधू संत के तुम रखवारे| असुर निकंदन राम दुलारे || 30 ||

अष्ट सीधी नवन निधि के दाता। अस वर दीन जानकी माता || 31 ||

राम रसायन तुम्हरे पासा| सदा रहो रघुपति के दस || 32 ||

तुम्रेह भजन राम को भावे| जनम जनम के दुःख बिस्रावे || 33 ||

अंत काल रघुबर पुर जी| जहा जनम हरी भगत कहेई || 34 ||

और देवता चितन धरयो| हनुमत सेये सर्व सुख करेई || 35 ||

संकट कटे मिटे सब पर| जो सुमेरे हनुमत बलबीर || 36 ||

जय जय जय हनुमान गुसाई| कृपा करो गुरु देव के नाइ || 37 ||

जो सैट बार पट कर कोई| चुतेही बंधी महा सुख होई || 38 ||

जो यहे पड़े हनुमान चालीसा| होए सीधी सा के गोरेसा || 39 ||

तुलसीदास सदा हरी चेरा| कीजेये नाथ हृदये महा डेरा || 40 ||

||*********|| दोहा ||*********||
पवनतनय संकट हरण , मंगल मूर्ति रूप| राम लखन सीता सहित, हृदये बसु सुर भूप||

आरती हनुमान लला की

आरती कीजै हनुमान लला की
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की
जाके बल से गिरिवर कांपे
रोग दोष जाके निकट न झांके
अनजानी पुत्र महाबलदायी
संतान के प्रभु सदा सहाई
दे बीरा रघुनाथ पठाए
लंका जारी सिया सुध लाए
लंका सो कोट समुद्र सी खाई
जात पवनसुत बार न लाई
लंका सो कोट समुद्र सी खाई
सियारामजी के काज संवारे
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे
आणि संजीवन प्राण उबारे
पैठी पताल तोरि जम कारे
अहिरावण की भुजा उखाड़े
बाएं भुजा असुरदल मारे
दाहिने भुजा संतजन तारे
सुर-नर-मुनि जन आरती उतारे
जै जै जै हनुमान उचारे
जो हनुमान की आरती गावै
बसी बैकुंठ परमपद पावै
आरती कीजै हनुमान लला की

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