अपनी लाइफ को पॉजीटिविटी बनाने के लिए करें ये 3 काम

अपनी लाइफ को पॉजीटिविटी बनाने के लिए करें ये 3 काम

डाउनलोड भजन द्वारा हम समाज में सकारात्मकता लाने के लिए हम पाठकों को नो निगेटिव लाइफ जीने के तरीके और इसके फायदे बताने के उद्देश्य  को इस शृंखला में आज जानिए अपने जीवन में पॉजीटिविटी कैसे ला सकते हैं इसको समजिये!…

अगर आप अपने लिए कुछ आसान से प्रयोग करेंगे तो पॉजीटिविटी आपके जीवन में उतर जाएगी। और आपको इसके लिए बहुत कुछ नहीं करना है। बस तीन काम किए जा सकते हैं। बहुत अधिक समय आपको नहीं देना है पढ़िए

1. श्री हनुमानचालीसा से मेडिटेशन
अपनी कमर को सीधा करके बैठ जाएं। आंखें बंद कर लें। नाभि तक गहरी सांस लें और नाभि से ही सांस को छोड़ें। ध्यान रखिए इस समय बिचारो को रखें और  विचार शून्य हो जाएं।

श्री हनुमानचालीसा में कुल 43 पद हैं। जब आप एक सांस भीतर लें तो क्रम से एक चौपाई उस सांस से जोड़ लें और मानसिक जप करते हुए भीतर लाएं। जब सांस बाहर जाए, तो इसी प्रकार दूसरी चौपाई उसके साथ बाहर जाने दें। तीन से पांच मिनट में यह क्रिया पूरी हो जाएगी और आप पूरी तरह से पॉजीटिव हो चुके होंगे।

2. रात को सोने से पहले
रात को अपने बेडरूम में आठ चरण की इस क्रिया को करें –
1. कंपन मिटाना- सीधे खड़े हो जाएं, दोनों पैर नीचे से चिपका लें, हाथ जोड़ें, आंखें बंद करें, गहरी सांस लें और ध्यान मूलाधार चक्र पर रखें।
2. निढाल होना- अपने आपको हल्का कर लें, पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के विरूद्ध न रहें। सांस के माध्यम से पृथ्वी से जुड़ जाएं।
3. प्राण वायु रोम-रोम में- गहरी सांस लें और महसूस करें कि प्राण पैर के अंगूठे, घुटने, सात चक्र में फैल जाए।
4. भ्रामरी जैसा- प्राणायाम की तरह ऊँ का गुंजन करें। हाथों से कान बंद नहीं करना है, फिर हृदय में इसी ध्वनि को सुनना है।
5. त्राटक- एक मोमबत्ती अपने सामने जलाकर रखें, आंखें बंद करें, पलकों को धीरे-धीरे खोलें, आधी खुली पलक से मोमबत्ती की लौ को देखें, फिर पलक पूरी खोलें, जितनी देर देख सकें देखें, फिर आंखें बंद करें और लौ को दोनों भोहों के बीच में देखें।
6. ओंकारनाद- ऊँ का गुंजन करना है, आंख बंद रखें, गहरी सांस भरें, फिर होठ खोलकर ‘अ’, ‘ऊ’ बोलते हुए 20 प्रतिशत समय लगाएं तथा 80 प्रतिशत समय ‘म’ बोलते हुए गुंजन करें, होठ बंद हो जाएंगे।
7. मेेडिटेशन- इसके बाद सांस के साथ श्री हनुमानचालीसा की चौपाइयों को भीतर-बाहर ले जाएं। सांस के साथ मानसिक जप वाला मेडिटेशन।
8. सोना- इसके बाद बिस्तर पर पीठ के बल लेट जाएं, नाक से सांस लें व मुंह से निकालें 7 बार और विचार शून्य सांस लेकर सो जाएं।

3. सुबह उठने के बाद
सुबह अपने बेडरूम में चार चरण में इस क्रिया को करें-
1. शैया स्नान- नींद खुलने पर अचानक न उठें। पीठ के बल लेटे रहें। महसूस करें कि रातभर की ऊर्जा पैर के पंजे से लेकर मस्तक तक और मस्तक से वापस पंजे तक हम ही सांस से पूरे शरीर में घुमा रहे हैं। इस दौरान कोई मंत्र या ईश्वर का नाम जप करते रहें। इसे मंत्र से भीतर का स्नान कहेंगे, जो शैया स्नान होगा। फिर बाईं करवट लें और बैठ जाएं।

1. नवजात हो जाएं- बिस्तर से पहली बार जमीन पर पैर रखते समय शांति से बैठे रहें और महसूस करें कि पृथ्वी की पॉजीटिव ऊर्जा सांस खींचते हुए हम शरीर में ले रहे हैं, फिर सांस छोड़ दें। पुन: सांस लेते हुए कल्पना करें कि पॉजीटिव ऊर्जा शरीर में ले रहे हैं, फिर सांस छोड़ दें। ऐसा कम से कम पांच बार करें। यह दिन की शुरुआत में पृथ्वी से हमारा पहला संपर्क है। पृथ्वी मां है। आज यह हमारा नया जन्म है। हम बिलकुल नवजात हैं।

यदि हो सके तो सांस के साथ श्री हनुमानचालीसा का मानसिक जप करें या अपने किसी मंत्र का जप कर लें।
3. स्वयं से परिचय- अपने वॉश रूम में सबसे पहले मिरर में अपना चेहरा देखें। गहराई से अपनी ही आंखों में झांकें। इस समय विचार शून्य रहें। चाहें तो इस समय श्री हनुमानचालीसा या अन्य किसी मंत्र का मानसिक जप करते रहें। पलकों को मिरर में देखते हुए धीरे-धीरे झपकाएं।

4. स्वयं से चर्चा- अब तक आप मौन थे, अब स्वयं से बातचीत शुरू करें। पांच प्रश्र पूछें- ये पंच तत्व से संबंधित होंगे।

1. पृथ्वी- धैर्य, 2. जल- शीतलता, सरलतता, 3. अग्नि- शौर्य, तेज, ओजस्विता, 4. वायु- सक्रियता, 5. आकाश- विशालता।
स्वयं सेे बात करते हुए कहना है कि मैं दिनभर इन पंच तत्वों से इनकी विशेषताओं को प्राप्त करूंगा/करूंगी। (आपको यह वार्तालाप पागलपन लगेगा, लेकिन करें जरूर। हल्कापन महसूस होगा और आज के उदद्ेश्य स्पष्ट हो जाएंगे) इस तरह आपका अपने से परिचय हो जाएगा। जिस शरीर (व्यक्तित्व) के साथ आपको दिनभर काम करना है, यह आपका उससे परिचय रहेगा।

5. जरा मुस्कुराइए- पहले मिरर में स्वयंं को देखकर मुस्कुराएं और फिर अपने घर के सदस्यों को देखकर।

6. देव-दर्शन- आपके निवास स्थान पर जहां भी मंदिर हो, उस स्थान पर जाएं। हाथ जोड़ें, आंखें बंद करें, पंजों को मिला लें। इस तरह आपकी मुद्रा होना चाहिए।

इसके बाद गहरी सांस खींचिए और कल्पना करिए कि मंदिर के उस स्थान की धरती से पॉजीटिव ऊर्जा अपने शरीर में ले रहे हैं, फिर सांस छोड़ दीजिए। जितना समय आपके पास हो, उतने समय करिए।
इस तरह अपनी दिनचर्या शुरू करें। अब आप तैयार हैं दुनिया की हर स्थिति का सामना करने के लिए।
इस समय आप पूरी तरह पॉजीटिव हैं।

नो निगेटिव मंडे का दैनिक भास्कर ऐसे ही पवित्र उद्देश्य के साथ आपके पास पहुंचा है।
अब आप इस अभियान का हिस्सा बन चुके हैं। यह ज्योत-से-ज्योत जलाने जैसा है। आपकी पॉजीटिविटी पूरे ब्रह्माण्ड का हिस्सा बनेगी।

खुश रहना और खुश रखना हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है।

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